भारतीय ज्ञान परम्परा में जैन गणितज्ञों का योगदान

Authors

  • Prof. (Dr.) V.K. Jain, Prof. (Dr.) Suresh Chandra Agarwal, Prof. (Dr.) S.K. Bandi, Prof. (Dr.) Padmavathamma, Prof. (Dr.) Pragati Jain, Prof. (Dr.) Anupam Jain

DOI:

https://doi.org/10.25215/1105488578.04

Abstract

भारतीय ज्ञान–परंपरा वैदिक तथा जैन परम्पराओं के संयुक्त प्रयत्नों का समन्वित रूप है। इन दोनों परम्पराओं ने मिलकर ज्ञान के विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। किन्तु जैन परम्परा की प्राचीन ग्रंथ-दृष्टि 19वीं शताब्दी तक पर्याप्त रूप से प्रकाश में न आने के कारण गणित–इतिहासकार तथा अन्य विद्वान इन योगदानों से अनभिज्ञ बने रहे। भारतीय ज्ञान–परंपरा के विविध पक्षों में भारतीय गणित–इतिहास का लेखन तो 19वीं शताब्दी के अंतिम चरण में आरम्भ हुआ, परंतु उसमें भी जैन परम्परा अपेक्षाकृत उपेक्षित रही।

Published

2026-03-17